सोना बढ़ रहा है, इक्विटी गिर रही है: क्या अब अपनी निवेश रणनीति बदलने का समय है?

जब सोने की कीमतें तेज़ी से बढ़ती हैं, तो निवेशक सोना खरीदना चाहते हैं।
जब इक्विटी तेज़ी से बढ़ती है, तो निवेशक इक्विटी में निवेश करना चाहते हैं।
जब रियल एस्टेट की कीमतें बढ़ती हैं, तो हर कोई अचानक प्रॉपर्टी एक्सपर्ट बन जाता है!
और जब बाज़ार गिरता है?
तब हर कोई अर्थशास्त्री बन जाता है।
लेकिन सिर्फ़ कल के विनर को आज के विनर से बदलते रहने से वेल्थ क्रिएट नहीं होती। निवेश की सही रणनीति क्या होनी चाहिए, यह समझने के लिए मेरी पोस्ट पढ़ें…

Gold Is Rising, Equity Is Falling: Is It Time to Change Your Investment Strategy?

When gold rises sharply, investors want gold.
When equity rises sharply, investors want equity.
When real estate rises, everyone suddenly becomes a property expert!
And when markets fall?
Everyone becomes an economist.
But wealth creation doesn’t work by constantly switching yesterday’s winner with today’s winner. Read my post to understand what should be the ideal investment strategy…

समझदार लोग अक्सर निवेश के गलत फ़ैसले क्यों लेते हैं?

कई बहुत होशियार प्रोफेशनल भी अक्सर निवेश में महंगी गलतियाँ कर बैठते हैं—ऐसा इसलिए नहीं कि उन्हें जानकारी की कमी होती है, बल्कि इसलिए कि वे इंसानी सोच (human psychology) के असर को कम आंकते हैं।
आइए, व्यवहार से जुड़ी चार आम गलतियों (behavioural traps) पर नज़र डालते हैं।

कितना पैसा काफ़ी है? दौलत का असली मतलब

पैसा हमें सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा, अच्छी शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और निर्णय लेने की आजादी देता है। यह हमें आपात स्थितियों से निपटने और अपने सपनों को पूरा करने में मदद करता है। इसीलिए समझदारी से कमाना, बचत करना और निवेश करना आवश्यक है।
लेकिन एक समय ऐसा आता है जब हमें खुद से पूछना पड़ता है, “कितना काफी है?”

पोर्टफोलियो को बार-बार देखने से रिटर्न नहीं बढ़ते, लेकिन चिंता ज़रूर बढ़ जाती है।

अपने म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो को लगातार चेक करना आपकी संपत्ति बनाने की प्रक्रिया को नुकसान पहुँचा सकता है। जानें कि लंबी अवधि के निवेशकों को, बार-बार चेक करने के बजाय प्रक्रिया पर भरोसा करने से कैसे फ़ायदा होता है।

बाज़ार में स्थिरता का इंतज़ार करना आपको ज़्यादा महंगा क्यों पड़ सकता है

मार्केट को ‘टाइम’ करने की कोशिश करना असल में समय की बर्बादी है… आइए समझते हैं कि ‘सही समय’ का इंतज़ार शायद कभी न आए.