लाल और हरा: पैसे के रंग

एक युवा प्रोफेशनल ने मुझसे एक बार कहा,

“सर, जैसे ही मार्केट लाल होती है, दिल तेज़ धड़कने लगता है। और जब हरी होती है, तो लगता है तुरंत निवेश कर देना चाहिए।”

वह किसी बड़े नुकसान या मुनाफ़े की बात नहीं कर रहा था — सिर्फ़ मोबाइल स्क्रीन पर दिख रहे रंगों की बात कर रहा था।
यही बात साफ़ दिखाती है कि लाल और हरा रंग हमारे पैसे से जुड़े फैसलों को कितनी गहराई से प्रभावित करते हैं।

पैसे और बाज़ार की दुनिया में ये दो रंग हर जगह छाए रहते हैं — अख़बारों में, टीवी चैनलों पर और मोबाइल ऐप्स पर।


रंगों के पीछे का इतिहास:

हालांकि ये रंग किसी भी सामान्य रंग की तरह दिखते हैं, लेकिन उनका असर बहुत पावरफुल होता है।

इतिहास में लाल रंग को खतरे, चेतावनी और नुकसान से जोड़ा गया है — जैसे ट्रैफिक सिग्नल या अलार्म। यह अपने आप डर और बेचैनी पैदा करता है।
वहीं हरा रंग प्रकृति, विकास, सुरक्षा और समृद्धि का प्रतीक है — जो सुकून और आगे बढ़ने का एहसास देता है।

रंगों का मनोवैज्ञानिक प्रभाव:

जब बाज़ार में इन रंगों का इस्तेमाल शुरू हुआ, तो यह कोई संयोग नहीं था।
कीमत गिरते ही लाल दिखती है और दिल घबरा जाता है।
कीमत बढ़ते ही हरा दिखता है और मन उत्साहित हो जाता है।

हमारा दिमाग़ अंकों से पहले रंगों पर प्रतिक्रिया देता है।
हमें यह समझने से पहले कि पैसा कितना बढ़ा या घटा, रंग हमें यह बता देता है कि हमें कैसा महसूस करना चाहिए।
लाल डर पैदा करता है — “कहीं और गिर न जाए, बेच दूँ?”
हरा लालच पैदा करता है — “अब नहीं खरीदा तो मौका निकल जाएगा!”


मीडिया की भूमिका:

मीडिया इस भावना को और बढ़ा देता है।
गिरावट में बड़ी-बड़ी लाल स्क्रीन और “क्रैश” जैसे शब्द दिखाए जाते हैं।
तेज़ी में चमकता हरा रंग और “सुनहरा मौका” जैसी हेडलाइन आती हैं।
ये रंग सिर्फ़ खबर नहीं दिखाते — हमारी भावनाओं को भी चलाते हैं।

यहीं ज़्यादातर निवेशक गलती करते हैं।
तेज़ी में खरीदते हैं और गिरावट में घबराकर बेच देते हैं।
जबकि असल में संपत्ति उन्हीं की बनती है जो लाल समय में शांत रहते हैं और हरे समय में संभलकर चलते हैं।

तो इन रंगों से कैसे निपटें?

पहली बात — ये रंग छोटे समय की चाल दिखाते हैं, स्थायी हकीकत नहीं।
दूसरी बात — अपने जीवन के लक्ष्यों पर ध्यान रखें, जैसे बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट।
तीसरी बात — बार-बार बाज़ार देखने और सनसनीखेज़ खबरों से दूरी बनाएँ।

सबसे ज़रूरी — अनुशासन रखें और सही सलाह के साथ निवेश करें।

बाज़ार हमेशा रंग बदलता रहेगा — कभी हरा, कभी लाल।
लेकिन आपकी ज़िंदगी की दिशा किसी स्क्रीन के रंग से नहीं बदलनी चाहिए।

जो अपनी भावनाओं पर काबू पाते हैं, वही संपत्ति बनाते हैं।
जो रंगों के पीछे भागते हैं, वे सिर्फ़ सपने देखते रह जाते हैं।

रंग (बाजार की खबरें) देखकर निवेश मत कीजिए — समझ, धैर्य और लक्ष्य देखकर कीजिए।

ऊपर दी गई पोस्ट सिर्फ़ इन्वेस्टर एजुकेशन के लिए है। मैं/हम AMFI-रजिस्टर्ड म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर काम करते हैं और इन्वेस्टमेंट सलाह नहीं देते हैं। इस ब्लॉग को इन्वेस्टमेंट सलाह या रिकमेंडेशन नहीं माना जाना चाहिए।

म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट मार्केट रिस्क के अधीन हैं। स्कीम से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट ध्यान से पढ़ें।

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